विचारधारा

#GlobalAppeal2018 – कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों के खिलाफ कलंक और भेदभाव समाप्त करने के लिए एक वैश्विक अपील

#GlobalAppeal2018

३० जनवरी २०१८ को निप्पॉन फाउंडेशन और डिसेबल्ड पीपल्स इंटरनेशनल ने ताज डिप्लोमेटिक होटल, नई दिल्ली में कुष्ठ रोग से त्रस्त लोगो से होने वाले भेदभाव के खिलाफ एक ग्लोबल अपील 2018 का आयोजन किया | इस कॉन्फ्रेंस से कुष्ठ रोग से त्रस्त लोगों और अन्य लोगों के बीच अंतर को कम करने में मदद मिलेगी।

कुष्ठ रोग एक चुनौतीपूर्ण विकलांगता है | कुष्ठ रोग का इलाज किया जा सकता है, लेकिन हम लोगों की मानसिकता को कैसे बदलें? इसी उद्देशय के साथ निप्पन फाउंडेशन के चेयरमैन माननीय योहेई ससाकावा एवं डिसेबल्ड पीपल्स इंटरनेशनल के ग्लोबल चेयर श्री मान जावेद आबिदी ने हाथ मिलाया |

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“डीपीआई और निप्पॉन फाउंडेशन अब अगले तीन वर्षों में भागीदार बन गए हैं ताकि कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्ति के साथ होने वाले भेदभाव को समाप्त करने के लिए एवं उन्हें हर प्रकार के सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके।” – योहेई ससाकावा, ( अध्यक्ष, निप्पॉन फाउंडेशन | कुष्ठ रोग उन्मूलन के लिए डब्ल्यूएचओ सद्भावना राजदूत)

 

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ग्लोबल अपील २०१८ एक आंदोलन है और डीपीआई इस का हिस्सा बनने के लिए सम्मानित एवं आदृत है। – जावेद अबिदी, ग्लोबल चेयर, डिसेबल्ड पीपल्स इंटरनेशनल

 

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“आज की सबसे बड़ी बीमारी टीबी या कुष्ठ रोग नहीं है, क्योंकि इन अवांछित शारीरिक रोग को हम चिकित्सा से ठीक कर सकते हैं, लेकिन अकेलेपन,  और निराशा का एकमात्र इलाज प्यार है।” – अमिताभ बच्चन

 

कुष्ठ रोग से त्रस्त व्यकितयों को लेकर बनी सामाजिक अवांछित विचारधाराओ को बदलने के लिए, हम सभी को एक साथ आगे आना चाहिए | सबसे जरुरी, मीडिया को एक ही प्रकार का संदेश देना चाहिए, जिससे कभी मिथ्या एवं भ्रम का कोई निशान न होगा |

सन 2005 में, दिल्ली में एक राष्ट्रीय स्तर सम्मेलन आयोजित किया गया था और जिसका उद्देश्य कुष्ठ रोग से त्रस्त लोगों को एक जगह इकट्ठा करना था, इन कॉलोनियों को कुष्ठ कॉलोनी या गांव भी कहा जाता है। जिससे वे एकसाथ आगे आकर संगठित हों और एक बेहतर ज़िन्दगी जी सकें ,अच्छी तरह से इलाज करा सकें | आज 770 कालोनियों में कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों की मौजूदगी है। निश्चित तौर पर स्वास्थ्य, शिक्षा और जागरूकता के लिए कुष्ठ कॉलोनियों में बदलाव भी हो रहा है।

 

श्री अनिल ने अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय एजेंसियों के बारे में बात की। “राष्ट्रीय एजेंसी में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि गैर-सरकारी संगठन अलग-अलग हैं। हमारा मुख्य प्रयास भेदभाव को खत्म करना है, इसलिए हमें ‘मैं’ के बजाय ‘हम’ के बारे में बात करनी चाहिए।” – अनिल कुमार

श्री मान पी के गोयल ने बताया, “सरकार ने आश्वासन दिया है कि कुष्ठ प्रभावित लोग सामान्य जीवन जीएंगे।”

#ग्लोबलअपील२०१८ में आये हर सम्मानित वक्ता का एक ही संदेश है कि हमें भेदभाव को रोकना और शामिल करने को बढ़ावा देना चाहिए।

तो आइये हम सब इसी सन्देश को अपनाते हुए कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों  के खिलाफ कलंक और भेदभाव को खत्म करने के लिए आगे बढ़ें |

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