राजनीति

अटल बिहारी बाजपेयी – एक अमिट महाकवि 

अटल बिहारी बाजपेयी जी का नाम लिखने में ही एक सुकून है | अटल बिहारी बाजपेयी, भारत की राजनीती में एक अमिट महाकवि हैं | अपने पूरे जीवन में उन्होंने भारत के विकास के लिए काम किया। अटल बिहारी बाजपेयी जी अपने वाक्चातुर्य में महान व्यक्तितव्य के इंसान थे | जब भारतीय जनता पार्टी बनी या फिर टूटी, परन्तु अटल बिहारी बाजपेयी जी एक अद्वित्य प्रतिभा के सामान उभरे | एक अच्छे राजनीतिज्ञ होने के साथ साथ बाजपेयी जी एक अच्छे कवी भी थे | उन्होने अपनी कविताओं के जरिए अपने भावनाये व्यक्त की, जिनमे से “क्या खोया क्या पाया” एक प्रसिद्ध कविता में, उनकी एक अमिट छाप रही है |

क्या खोया क्या पाया जग में | मिलते और बिछड़ते पग में |
क्या खोया क्या पाया जग में | मिलते और बिछड़ते पग में |

मुझे किसी से नहीं शिकायत, यद्यपि चला गया पग पग में
एक दृस्टि बीती पर डाले, यादो की पोटली टटोले
एक दृस्टि बीती पर डाले, यादो की पोटली टटोले
अपने ही मन से कुछ बोलें, अपने ही मन से कुछ बोलें |

पृथ्वी लाखो वर्ष पुरानी , जीवन एक अन्नंत कहानी
पृथ्वी लाखो वर्ष पुरानी , जीवन एक अन्नंत कहानी

पर तन की अपनी सीमाएं, यद्यपि सुआ सारदों की वाणी
इतना कभी है अंतिम दस्तक पर, खुद दरवाज़ा खोले
इतना कभी है अंतिम दस्तक पर, खुद दरवाज़ा खोले
अपने ही मन से कुछ बोलें, अपने ही मन से कुछ बोलें |
अपने ही मन से कुछ बोलें, अपने ही मन से कुछ बोलें | …

अटल जी का राजनीतिक सफर

अटल बिहारी बाजपेटी जी सन 1955 से 1977 तक जनसंघ के नेता रहे | वाजपेयी जी ने 1 9 57 में संसद के लिए अपना पहला चुनाव जीता था। पक्ष हो या फिर विपक्ष, अटल जी सदैव किसी पार्टी विशेष के नेता से, कंही अधिक सम्पूर्ण देश के नेता की छवि के रूप में जाने गए | यही उनकी सबसे बड़ी महानता थी, कि वे भारत कि राजनीति में एक साफ़ सुथरी छवि के रूप में उभरे | उन्हें भारत का सबसे सम्मानित पुरस्कार, भारत रत्न पुरस्कार दिया गया है।

विपक्ष नेता होने के बावजूद, श्री मति इंदिरा गाँधी जी को दिल से सम्मान देना उनका सोदाह्र था | क्यूंकि आज की कुटिल राजनीति में तो बस संसद कि कार्यवाही को स्थगित करवाना ही विपक्ष का एकमात्र उद्देश्य है |

अटल बिहारी बाजपेयी

न जाने कब हमे, अटल बिहारी बाजपेयी जैसे अच्छे नेता मिल पाएंगे ? न जाने कब हमारे भारत के राजनीतिज्ञ इस छोटी और कपटी राजनीतीयों के छल से बाहर आएंगे? न जाने कब एक सुखहाल एवं समृद्ध भारत के लिए मिलकर दोनों पक्ष एक साथ कदम बढ़ाएंगे ?

 

 

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